बचपन में जब सुनता था या पढ़ता था कि अमुक ने अमुक महिला से दुष्कर्म किया या बलात्कार किया तो एक उत्सुकता जगती थी कि आखिर ये होता क्या है , खैर हिंदी प्रेम और भाषा कि अभिव्यक्ति बता देती थी कि कूछ गलत ही होता होगा, घर के बड़ो से पूछने कि कोशिश करता तो वो बात को घुमा देते थे, कुछ बड़ा हुआ तो एहसास हुआ इस घृणित कार्य के बारे में, अपितु एक तरीके से कहूं तो ज्ञान हुआ, फिर सोचता था कि कोई ऐसा भी कोई कर सकता है , कैसे कोई किसी को इस तरह आहत कर सकता है, कैसे कोई किसी किसी को रोता हुआ देख कर उसपे रहम नहीं खाता, कैसे एक पल में इंसानियत हैवानियत में परिवर्तित हो जाती है , समय बीता फिर एहसास हुआ कि कुछ पुरुष वासना ग्रसित हो के ये कृत्य कर जाते हैं और बाद में उन्हें उतनी ही ग्लानि होती है जितने हमें सुन के,और कुछ के मन में शायद ये भाव हमेशा ही रहता है और जब भी अनुकूल समय होता है वो इस घृणित कार्य को अंजाम देते हैं और उन्हें इस पर कोई अफ़सोस भी नहीं होता पर शायद किसी ने ये नही सोचा कि ऐसी वासना अति ही क्यूँ है , क्यूँ वेदों में लिखा है कि एक पुरुष को अपनी माता या बहन के साथ भी ज्यादा समय तक एकांत में नहीं रहना चाहिए ? खैर ये मेरा विषय नही है , जहा तक मैंने जाना है हर वो कार्य जो किसी के मन मस्तिस्क को जकझोर दे, उसके वजूद को हिला कर रख दे, उसे मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना दे बलात्कार के अंतर्गत ही आता है , क्या हमारा दिल इतना क्रूरु हो गया है की हमें किसी और को प्रताड़ना दे के ही ख़ुशी मिलती है ? हमारे हवस की आग इतनी प्रचंड हो गयी है ? घिन्न आती है मुझे ऎसी सोच मात्र से।
समय बीता और सुनाई ये देने लगा कि अमुक महिला ने ये आरोप लगाया कि फला पुरुष मेरा पिछले १० वर्ष से शोषण या बलात्कार करता आ रहा है, मन थोडा सोच में पपड़ गया कि भैया ये कौन से प्रकार का बलात्कार है, तो पता चला ये क़ानूनी कमजोरी का लाभ उठाने कि कोशिश , भाई अगर कल आप किसी लालच बस किसी के साथ सोयी और आज उसे पूरा नहीं होते हुए देख रही हैं तो उसे क़ानूनी शकंजे में फंसा रही हैं , ये कहे का बलात्कार ?? और अगर ये बलात्कार है तो गुनहगार दोनों है कोई एक नहीं। मुझे लगता है हमें इस पहलु पे सोचना चाहिए। और कभी लगता है कि आज भी मै बच्चा ही होता तो ठीक होता, कुछ पता ही नहीं होता और अपनी दुनिया में मस्त होता ???????Wednesday, 5 February 2014
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