Friday, 30 September 2022

रातो रात दिग्विजय से खड्गे ?

                                                रातो रात दिग्विजय से खड्गे ?

एक बार फिर कांग्रेस में या यूँ कहें कि परिवार में राहुल गाँधी की नहीं चली, मौजूदा हालात को काबू करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के तौर पर भेजे गए उनके दूत श्री दिग्विजय सिंह पर सोनिया गाँधी के सलाहकार भारी पड़ गये !

एक दौर था जब दिग्विजय सिंह को राहुल का राजनैतिक गुरु माना जाता था, उस दौर में राहुल भट्टा पारसौल जैसे आन्दोलन किया करते थे, 2009 के लोकसभा चुनावो में कांग्रेस को मिली जीत, विशेषकर उत्तर प्रदेश में 21 सीटो पर कांग्रेस का जीतना राहुल का ही करिश्मा था और निश्चित तौर पर दिग्विजय सिंह की मेहनत.

वक्त बदला, हालात बदले .. राहुल अब देश के सामने पप्पू घोषित हो चुके थे, कुछ वर्षो पहले देश भर में राजकुमार जैसा प्यार पाने वाले  राहुल अब सोशल मीडिया पर महज मीम्स बनाने के काम आते थे, ये वो दौर था जब राहुल के सलाहकारों में उनके अपने स्वघोषित राजनैतिक सलाहकारों ने ले ली थी, अब ये लोग तय करने लगे थे कि राहुल किससे मिलेंगे, किससे नहीं , वो किसका फोन लेंगे किसका नहीं और उसी दौर में गोवा चुनाव में दिग्विजय सिंह को सरकार बनाने भेजा गया, इन्ही तथाकथित सलाहकारों की वजह से और राहुल गाँधी तक सही खबर नहीं पंहुचने या आलाकमान से सीधा संपर्क ना होने की वजह से गोवा में सरकार नहीं बन पाई और उसका ठीकरा दिग्विजय सिंह पर फोड़ दिया गया, और उन्हें अब राहुल के आन्तरिक वृत्त से परिधि के बाहर भेज दिया गया, दिग्विजय सिंह ने हिम्मत नहीं हारी, काम करते रहे नर्मदा यात्रा के दौरान लाखो कार्यकर्ताओ को जगाया, फलस्वरूप मध्य प्रदेश में अच्छे परिणाम आये . 

एक बार फिर जब कांग्रेस हासिये पर है, दिग्विजय सिंह ने भारत जोड़ो यात्रा की परिकल्पना की और राहुल को इस यात्रा के लिए राजी और एक बार फिर वो राहुल के करीबियों में शामिल हो गए, लगभग 5-7 वर्षो के वनवास के बाद राहुल के  साथ साथ वह यात्रा पर निकले और कुछ दिनों पहले उपजे विवाद को ख़त्म करने और दिग्विजय जैसे मंझे हुए नेता को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाकर राहुल ने दिल्ली भेजा, पर दिल्ली में बैठे सोनिया गाँधी के टीम के लोगो को यह बात रास नहीं आई और रातोंरात कहानी फिर से बदल दी गयी. 

दिग्विजय सिंह ने तुरंत अपना रुख बदला और आलाकमान के आदेश को सर आँखों पर रखते हुए चुनाव लड़ने का इरादा छोड़ दिया और शायद वो एक दो  दिनों में वापस भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हो जाये . 

ये वो दिग्विजय सिंह हैं जिन्हें बिना किसी गलती के राहुल की टीम से बाहर कर दिया गया पर उन्होंने कोई बदजुबानी कभी नहीं की और उसका नतीजा ये कि आज वो फिर से टीम में हैं.

एक अहम् बात, राहुल आखिर अध्यक्ष बनना क्यूँ नहीं चाहते हैं ? सबसे पड़ी वजह यही कि उनकी लड़ाई सिर्फ कांग्रेस के पुराने नेताओ से नहीं बल्कि अपने परिवार से भी है, सैद्धांतिक तौर पर उनके विचार सोनिया गाँधी से कभी मेल नहीं खाते और यही वजह है कि उनके लिए कई फैसले बदल दिये जाते हैं, सबसे ताजा उदाहरण कांग्रेस अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी का ..

दिग्विजय अगर अध्यक्ष बनते तो पूरे देश में कार्यकर्ताओ के नाम पर शुन्य पड़ी कांग्रेस में जान फूंकने का काम करते, देश भर में संगठन के तौर पर कांग्रेस की एक फ़ौज जरुर खड़ी हो जाती .. हालाँकि अब जब खड्गे अध्यक्ष बन रहे हैं और वो शायद अभी तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं, हो सकता है उनका कोई लक चल जाये और कांग्रेस आने वाले कुछ चुनाव जीत पाए . 


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