Sunday, 8 November 2015

बिहार चुनाव की समीक्षा

                                    लालटेन के तेल ने ऐसा तीर चलाया है,
                              हाथ मिला एक दूजे से कीचड़  में कमल घुसाया है 
आज लालू ने सिद्ध कर दिया कि  उनसे बड़ा राजनीतिज्ञ कोई नहीं है, हासिये पर पड़े होने के बाद एक बार फिर  किंग मेकर बन जाना ये उनकी सूझ बुझ और राजनीतिक समझ को दर्शाता है , समीकरण और कारण जो भी हैं पर लालू ने जो  लामबंदी की उसका अच्छा परिणाम आज मिला, साथ में नितीश की साफ सुथरी छवि और उनके द्वारा किया गया काम. कांग्रेस में जो थोड़ी बहुत जान आई उसका श्रेया बिना किसी संदेह राहुल को जाना चाहिए 
पर इन सबका ये मतलब नहीं की अमित शाह की रणनीति में अब वो धार नही, ये उनकी रणनीति ही थी कि उनको पहले और दूसरे चरण के चुनाव के बाद ही पता चल गया था की वो कही ना कही पीछे  हो रहे हैं और फिर उन्होंने अपना रामबाण छोड़ा, जो कि नही चल पाया, कारण लोगो ने पहले अपनी जात देखी, बाद में धर्म, मोदी का डीएनए वाले बयान का भी नितीश बाबू ने खूब फायदा उठाया, एवं भागवत जी के बयान का लालू ने, क्या है कि बिहारी भाइयो ने इन सब बातो को दिल पर ले लिया। ५३ सीट जितने के बावजूद भी एक चौथाई प्रतिशत मत पाना ये अमित शाह के राम बाण का ही नतीजा है, जो बुद्धजीवी और पत्रकार ये विश्लेषण कर रहे हैं की अमित शाह का ये दांव उल्टा पड़ गया उन्हें एक बार फिर से इस पर  विश्लेषण करना चाहिए, जहा तक मेरी समझ है ये दांव आने वाले उत्तर प्रदेश में कारगर साबित हो सकते हैं, पर अगर इस के अलावा ही चुनाव हो तो ज्यादा बेहतर है, 
दूसरी तरफ मुस्लिम मतदाताओ के पास महागठबंधन के अलावा और कोई विकल्प नही था, उनकी तथाकथित चहेती पार्टिया एक साथ थी तो  उनके वोट का विभाजन नही हो पाया और उसका नतीजा हम सब के सामने है, बाकि ज्यादा दिमाग ना लगाइये, देखिये अगले पांच साल जेपी के चेले क्या क्या करते हैं  ??

रातो रात दिग्विजय से खड्गे ?

                                                रातो रात दिग्विजय से खड्गे  ? एक बार फिर कांग्रेस में या यूँ कहें कि परिवार में राहुल गाँधी ...