Tuesday, 1 August 2017

नीतीशे कुमार

                        बिहार में बहार  बा, नीतीशे कुमार बा, हालाँकि ई  अब्बो बा, पर आखिर बार बा !
व्यक्तिगत रूप से मै  नीतीश  कुमार के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित रहा हूँ , उनके बात करने का अंदाज, भाव भंगिमा सब एक ईमानदार नेता होने का संकेत  देती है, और शायद उनकी यही बात उनके अंदर पनप रहे कुछ और मसलो को बाहर  नहीं  देता। 
              पार्टी में कभी नंबर एक रहे जॉर्ज फर्नांडिस को कब चलता कर दिया, किसी को भनक तक नहीं लगने दी, शरद यादव जैसे जमीनी नेता को कब जमीन  पर ला दिया , उसका  एहसास खुद शरद  जी  को भी काफी  अर्सो बाद हुआ, हालाँकि राजनीति  में यह होना भी चाहिए, अगर आप बेहतर हैं तो कमतर को नीचा  करना ही पड़ेगा, नरेंद्र मोदी ने भी अगर लिहाज़ किया होता तो कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाते, पर यही उपेक्षा कभी कभार भारी  पड़  जाती है, हालाँकि यह कभी  कभार ही होता है हाँ कांग्रेस में यह अमूनन देखने को मिल जाता है।  
              नितीश ने  2014 में जब  त्याग की भावना दिखाकर और नैतिक जिम्मेदारी  के नाम पर अपना इस्तीफा  दिया था और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर वोट बैंक का पास  फेंका था, तब वोट बैंक की राजनीति  सधी या नहीं यह तो नहीं पता , पर उनके गले की गले की हड्डी जरुर बन गयी थी। आज जब फिर एक बार नितीश ने अपनी इमेज सुधारने या जो भी करने  के नाते इस्तीफा  दिया है, जहाँ तक मै  देख पा रहा हूँ, एक  बार फिर से उन्होंने अपने पैर  पर कुल्हाड़ी मार  ली है, और ऐसी कुल्हाड़ी जिसका जख्म कभी सूखेगा नहीं।  इस बात की आशंका मुझे थी की महागठबंधन जरूर टूटेगा पर, इतना जल्दी ? यह नहीं सोचा था, मेरे अनुसार यह कहानी 2019  तक जा सकती थी , पर मुझसे लाख गुना बड़े राजनीतिज्ञ श्रीमान अमित शाह ने मेरा सोचा गलत ठहरा दिया , अगर नितीश ने IB  के रिपोर्ट्स के अनुसार इस्तीफा दिया है तो उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि  इंदिरा गाँधी ने जब आपतकाल  लगाया  था, तब भी IB  ने यह रिपोर्ट दी थी कि मैडम चुनाव करवाइये , जनता बहुत खुश है और नतीजे आप सब के सामने हैं। 
बीजेपी 2019 में कितना बम्पर करेगी इसका अंदाजा  2018  के अंत तक हो जायेगा और अति बम्पर की स्थिति में बिहार का चुनाव बीजेपी गठबंधन में कतई  नहीं  लड़ेगी और उसका पूरा खामियाजा नितीश को भुगतना पड़ेगा , क्यूंकि जो वोट बैंक नितीश का है लगभग  वही वोट बैंक  बीजेपी का भी है, और लालू  के वोटो में सेंध लगाना लगभग नामुमकिन के बराबर है, और यह भी संभव है कि  लालू ने जानते हुए भी नितीश को जाने दिया हो, क्युकि  लालू जैसे घाघ नेता के दिमाग में क्या चल रहा है, यह किसी को नहीं पता।
             खैर जो भी हो, नितीश आज मुखिया हैं, कल हो ना  हो, यह बात नितीश को पता है या नहीं बस यह नहीं पता, एक बात की तारीफ जरूर करनी पड़ेगी उनकी कि  मौजूदा परिस्थियों को कैसे सम्भाला जाता है, यह उन्होंने सिद्ध किया है, बाकि भविष्य किसने देखा है !
              
              
              


















रातो रात दिग्विजय से खड्गे ?

                                                रातो रात दिग्विजय से खड्गे  ? एक बार फिर कांग्रेस में या यूँ कहें कि परिवार में राहुल गाँधी ...