Friday, 17 August 2018

अ "टल "

                                                                अ "टल "
पिछले कई वर्षो से एक प्रखर वक्ता, स्वप्नद्रष्टा ना कुछ बोल पा रहा था ना कोई स्वप्न देख पा रहा था, अंदाजा लगा सकते हैं उसकी पीड़ा का, खैर वह बोलता भी तो किसके लिए ? अब उसकी सुनने वाला कौन था ?और उसके सपनो को बुनने वाला कौन था? शायद इसीलिए उसने कभी कोशिश भी नहीं की होगी। 
       कम  से कम  मै जब कभी सोचता हूँ कि  कोई ऐसा वक्त आएगा जब मै  सोच नहीं पाउँगा तो अजीब सी घबराहट होने लगती है, यही घबराहट वो इंसान ना जाने कितने वर्षो से झेल रहा था, आज जो लोग अटल के जाने को एक युग का अंत बता रहे हैं उन्होंने उस अटल की बीते इतने वर्षो में  देहरी भी नहीं नांघी, पुरे साल के विजिटर रजिस्टर में एक दो बार की एंट्री राजनाथ या आडवाणी जी की देखी जा सकती है बाकी माननीय लोगो को फुर्सत मिली जब वो AIIMS  में आ गए , कुछ माननीय तो ऐसे भी हैं जो पहले मीडिया को ज्ञापन भेजते हैं और फिर अटल जी को AIIMS  देखने जाते  हैं , अच्छा ही हुआ की अटल ऐसे लोगो को पहचानने में असमर्थ हो चुके थे। 
        मै शिशु मंदिर में था जब अटल जी देश के प्रधानमंत्री थे, राजनीति  में रूचि थी पर इतने संसाधन नहीं थे कि तब दिल्ली में चल रही बारीकियों पर नजर रख सकता, अख़बार मंगवाने की भी हैसियत तब नहीं थी बस विद्यालय के माध्यम से ही ये सब खबरे पता चलती थी, १३ दिन की सरकार गिरने के बाद हमने गाँव  गाँव ये मुहीम भी चलायी कि पहले १३ दिन, फिर १३ महीने और अब १३ साल तक अटल जी की सरकार आनी चाहिए ,हालाँकि वो बस ५ साल के लिए ही आ पाए। उनके ओजस्वी भाषणों ने हमेशा आकर्षण पैदा किया, उनकी कविताये आज भी सुनता हूँ देशभक्ति की एक लहर दौड़ पड़ती है।  पर मैंने उनके लम्बी उम्र की दुआ कभी नहीं की, मै हमेशा यही चाहता था कि यह युगपुरुष जितनी जल्दी मुक्त हो जाये उतना ही अच्छा, पिछले कुछ दिनों में मैंने देखा कि लोग उनके ठीक होने की दुआ कर रहे हैं , जब वो शैय्या पर चला गया तक किसी ने दुआ नहीं कि आज जब वो मुक्ति के कगार पर हैं तो दुआ ? समझ नहीं आता हम इतनी अंधभक्ति और दिखावा लाते कहाँ से हैं , उनके शरीर छोड़ने से उनके विचार समाप्त नहीं होने वाले अपितु वो सदा सदा के लिए अमर हो गए पर दैहिक कष्ट जरुरु समाप्त हुआ जो बहुत पहले हो जाना चाहिए था, पर ईश्वर की इच्छा के विपरीत कुछ हुआ है भला ? खैर मुझे लगता है असली कहानी अभी शुरू होनी बाकि है, कांग्रेस पूरे चुनाव में अटल के बहाने मोदी को घेरेगी और बीजेपी अटल के सिद्धांतो और स्वप्नों की दुहाई देकर वोट मांगेगी और अगर ऐसा हुआ तो मानिये वो सच्चे कार्यकर्त्ता थे जो मरने के बाद भी अपना अंश पार्टी को दे रहे हैं, बाकी इस धरती का केवल और केवल एक  अटल सत्य है और वो है मृत्यु , किसी की बारी आज है किसी की कल इसलिए कुछ ऐसा कर जाओ कि तुम्हारे मरने के बाद भी लोग DP लगाए, ब्लॉग लिखे, और तुमपर अपनी राजनीती चमकाए !!जय हिन्द !! 

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