अरे उ वाला नहीं, लुप्लुपवा रेडलाइट की बात बात कर रहे हैं ,जिसके इशारे पर इंसान रुकने और चलने लगा है , रोड का भगवान भी कह सकते है उसे। इलाहाबद में अभी नवा नवा रेड लाइट लगा त , खबर पहुँचते पहुँचते पप्पू के मम्मी तक बात पहुंची , अब उ परेशान कइसन होत है ई नाशपीटी रेडलाइट ,ई कैसे रोक सकत है पप्पू के पापा को और उनका स्कूटर के , मतलब के अब हमरे अलावा पप्पू के पापा अब एहु के कहा मनीहे,दुपहरिया से शाम हो गयी , आज झपकी तक नहीं मारी बस इसी इंतज़ार में की कब पप्पू के पापा आये और उ स्कूटर पे बैठ के रेडलाइट देख के आएं , स्कूटर के हारन सुनते ही जैसे पीहर से कोई आ जाता है उस तरीके का आभास हुआ और मुस्कुराते हुए स्वागत हुआ पहली बार दफ्तर से आने के बाद , वो भी परेशान की आज क्या स्पेशल है जो बीस साल में नही हुआ वो आज हो रहा है , ई लो पानी पी लो और कपडा नहीं निकालना हम तनिक घूमने चलेंगे , तुम्हारे स्कूटर पे बैठे बहुत दिन हो हो गया , अमा तुम भी गजब करती हो , इतवार को चलना अभी बहुत थके हैं , हा हमें काहे ले के चलोगे , कभो ले के गए हो जो आज ले के जाओगे , २० साल हो गए एक साडी तक नही दिलाये घुमाओगे क्या , जाओ जा के खाना बना लो आज हमरी तबियत ठीक नही है... अजीब मुसीबत है यार पप्पू के पापा फुसफुसाते हुए , चलो भाई हम तो मज़ाक कर रहे थे बस। अब तैयारी शुरू , अच्छा इ बताओ जे इ रेडलाइट है ओमा खाली लाल रंग ही होत है , अरे नहीं भाई लाल ,पिला , हरा तीन रंग होते हैं , अब आधे घंटे बाद तीनो कलर कॉम्बिनेशन वाली चमचमाती साडी पहने स्कूटर पे बैठ के पहुंच गयी कीटगंज चौराहे , अच्छा ई है रेडलाइट , हा लाल हो तो रुकते हैं , हरी हो तो जाते हैं , अब दूसरे तरफ की लाइट लाल हुई तो स्कूटर से उत्तर के सोची सड़क क्रॉस कर लें चमचमाते हुए , पर ई तो अलाहाबाद के लड़के , अमा मारो अत्ति बत्ती कौन रुके , अब उधर से बाइक इधर से पप्पू की मम्मी, अब हो गया कॉम्बिनेशन, गिर पड़ी सड़क पे बाइक से टकरा के , कहानी लिखे जाने तक अस्पताल में भर्ती हैं और एक हाथ टूट गया है
Sunday, 16 August 2015
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