बचपन से मुझे एक ऐसे इंसान की तलाश थी जो मेरे हर छोटे ,बड़े गलत सही बात का जवाब दे सके और मुझे बता सके की क्या सही है क्या गलत है, हर गुरु पूर्णिमा जब माँ पिता जी अपने गुरु के पास जाते थे तो लगता था की क्या मुझे भी ऐसे गुरु मिलेंगे जिन्हे मै दिल और दिमाग दोनों से गुरु मानूंगा ? प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई पढ़ाने वाले बताने वाले लोग मिले पर कोई गुरु नहीं मिला, हा श्री कृष्ण को मै हमेशा अपने सैद्धांतिक गुरु मानता था, मानता हूँ , पर मुझे उस गुरु की तलाश थी जिसे मै मुझे समझाते हुए देख सकूँ, और जिसके सामने बैठ कर लगे कि मै तो कुछ जानता ही नहीं, और मेरी तलाश एक दिन ख़त्म हुई जब कुछ महीनो पहले माननीय गोविंदाचार्य जी से मिला और उनसे मिलकर लगा की मै तो शून्य हूँ और वो ज्ञान की खान, जमीन से जुड़ा उनका अनुभव, २०० वर्ष आगे देखने की शक्ति, मनुष्य को उसके बोलने से आंकने का हुनर, ना जाने और कितने गुण और ज्ञान से भरा है उनका मस्तिष्क , जीवन और देश का कोई ऐसा पहलु नही जिसपे उनका अनुभव और दूरदर्शी सोच ना झलकती हो , मैंने अपने सामाजिक, राजनीतिक , शैक्षणिक दौर मै गोविन्द जी जैसा विद्वान ना ही देखा ना ही सुना और ना ही भविष्य में किसी ऐसे अद्वितीय विद्वान से मिलने के आसार हैं क्यूंकि मै नहीं समझता की जीवन के हर क्षेत्र का अनुभव और ज्ञान उनसे अच्छा कोई रखता होगा , ऐसे गुरु गोविन्द , गोविन्द जी को गुरु गोविन्द वाले दिवस मै शत शत नमन करता हूँ
Saturday, 5 September 2015
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