बचपन से लेकर अब तक हमारे बीच रावण एक आततायी के रूप में परोसा गया, पुतले फूंकते हुए बड़े हुए हैं हम, रावण की तुलना हमेशा असत्य और राम की सत्य से की गयी , पर क्या कभी हमने ये समझने की कोशिश करी क्या रावण सच में इतना बुरा था, कि हमें हर वर्ष उसका पुतला फूंकना पड़ता है? क्या राम सच में इतने आदर्श थे कि उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाये या राम के महिमांडन मात्र के लिए रावण को इतना बुरा बना दिया गया ?
मानता हूँ रावण ने अपनी असीम शक्तियों का गलत प्रयोग किया , पर क्या इंद्र ने नहीं किया ? फिर इंद्र को देवता और रावण को राक्षस क्यों ? क्या इसलिए की उसने कुछ असंभव कार्यो को पूरा करने का बीड़ा उठाया था, या इसलिए कि उसने अपनी बहन के नाक कान काटने वाले की बीबी को कैद कर लिया था ?
आज के आधुनिक समाज की भी बात करू तो हर इंसान अपनी घर की औरतो को लेकर बहुत ही सजग और भावुक है , रावण भी था तो उसमे क्या गलत ? उसने सीता के साथ कुछ गलत तो नहीं किया कभी और ना ही कोई ग्रन्थ ये सिद्ध करते हैं कि उसके मन में भी सीता के लिए कुछ गलत था, उसने सीता को प्रस्ताव जरुर दिया था पर उस हिसाब से तो आज हिंदुस्तान का हर दूसरा इंसान रावण है फिर हम अपने उस रावण रूपी भाव को ना जला के रावण के पुतले को क्यों जलाते हैं ? वो राम जिसके लिए सीता ने अपना सब कुछ त्याग दिया, उस सीता को वनवास भेजने से पहले एक भी बार नहीं सोचा, और वो रावण जिसने इतने दिनों तक सीता को अपने क्षेत्र में कैद रखा कभी स्पर्श तक नहीं किया? किसको महान मानते हैं आप ?
रावण इतना ही बुरा था तो क्यों राम ने लक्ष्मण को उसके पास ज्ञान लेने के लिए भेजा था और राम ने जब शिव लिंग की स्थापना रामेश्वर में करायी तो पूजा रावण से क्यों करायी ? और उसी रावण ने राम को विजयी भवः का आशीर्वाद भी दिया था जब लिंग स्थापना के बाद राम ने उसके पैर छुए थे , उसी विद्वान रावण ने मृत्यु के समय लक्ष्मण से कहा कि युद्ध में राम नही मै विजयी हुआ हूँ, क्युकि मेरे जीते जी राम मेरे राज्य में प्रवेश नहीं कर पाये जबकि राम के जीते जी मै उनके धाम बैकुंठ में प्रवेश करने जा रहा हु, ऐसे विद्वान और सर्वज्ञानी रावण को हम कैसे सिर्फ असत्य और अधर्म की उपमा मान लेते हैं, यह एक सोचने का और बहस का विषय है ?
मुझे लगता है रावण का पुतला फूंकने से अच्छा है कि हम अगर रावण को जिन कार्यो या गलत अफवाहों की वजह से गलत मानते हैं उन आदतो को अपने अंदर से मारे, ये दिखावे मात्र से हम राम को तो आदर्श बना सकते है पर ना ही राम की अच्छाइयों को अपने अंदर ल सकते हैं ना रावण की बुराइयो को मार सकते हैं, बाकी दशहरा की हार्दिक शुभकामनाये !!