अगर बारीकी से देखे तो बिहार चुनाव अभी बीते लोकसभा चुनाव से कुछ ज्यादा अलग नही है, तब मोदी चेहरा थे अब नितीश, ताबड़तोड़ रैलियां, सभाएं, टीवी पे साक्षात्कार जितनी मोदी ने की थी , नितीश भी उतनी ही कर रहे हैं, जो PR एजेंसी मोदी के लिए काम करती थी वो अब नितीश के लिए कर रही है, इन सबके पीछे कारण ये भी हो सकता है, अगर विभिन्नताओं की बात करे तो नितीश उतने सीट से चुनाव भी नही लड़ रहे जितना बहुमत के लिए चाहिए।
खैर बात चुनाव में जीतने या तैयारियों की करे तो अभी सिर्फ बात ही कर सकते हैं यहाँ तक की अनुमान लगाना भी मुश्किल है, खुद मतदाता को नही पता की वो किसको वोट देने जा रहा है, हालाँकि उत्तर प्रदेश और बिहार में चुनाव के पहले वाली रात में ही तय होता है कि हम किसको वोट देंगे कल, कभी कभार तो लाइन में खड़े होने के बाद निर्णय लेते हैं,
जहा तक मै महागठबंधन को देखता हु, एक बहुत ही सधा हुआ तीर छोड़ा है नितीश ने, मछली की आँख भेदने में ये सक्षम भी है और प्रयासरत भी , बस गाय, घर वापसी जैसे मुद्दे सर चढ़ के ना बोलने लगे, क्यूंकि ऐसा हुआ तो जात पात भूल के बात हिन्दू मुस्लमान पे आ जाएगी जैसे लोकसभा के चुनाव में हुआ था और बसपा जैसी पार्टी शून्य पर आ गयी थी, इसलिए नितीश को यहाँ सेक्युलर वाले तीर को कमान में ही रखना होगा, वो कुछ नही बोलेंगे तब भी मुस्लमान उन्हें ही वोट देगा , वो अपने सुशासन और लालू अपने जात वाले मुद्दे पर ही टिके रहे तो बढ़िया होगा, बाकि ८-१० सीट उन्हें राहुल गांधी दिलवा ही देंगे।
अब अगर बात चुनाव के महा रणनीतिकार अमित शाह की करू तो उनका कोई तोड़ नही, हर मुद्दे, हर व्यक्ति को वो लगा देंगे तो एक एक वोट के लिए, मोदी जैसा दहाड़ने वाला वक्ता कुछ जोशीले युवाओ में साइकिल के टायर में हवा का काम करेगा बस कुछ स्थानीय नेता उसे फुस्स ना करने की कोशिश करे, वैसे इन सबपे नजर रखने के लिए अमित शाह ने अपना अड्डा वही बना रखा है।
और अगर अब मै दोनों विरोधियो को तराजू के पलड़े पर रख कर आँकु तो ये साफ है कि अभी तक दोनों बराबर हैं और अगर चुनाव के दिन तक बराबर ही रहे तो चुनाव बाद घर फुटौअल की नौबत जरूर आएगी और अगर कोई थोड़ा सा भी गड़बड़ाया तो दूसरा बाजी मार लेगा, जैसे लालू अभी फंस गए थे गाय के मांस पर बोल कर और मोदी कुछ दिनों पहले DNA वाला बयान दे के, कल पहली बार लालू को पेपर पर लिखा देख कर भाषण देते हुआ सुना, हो सकता है damage control की तैयारी हो और आगे कुछ ऐसा वैसा ना बोल जाये उसके लिए सावधानी।
खैर मज़ा लीजिये चुनावी समर का, लड़ाई मज़ेदार है , रविश की ग्राउंड रिपोर्ट, ज़ी न्यूज़ का भाजपा प्रचार, आज तक का मोदी विरोध, रजत शर्मा का मोदी गुणगान, ये सब आपके enjoyment में चार चाँद लगा देंगे,
बाकि जो है सो हइये है, सही कहतानी ना ?
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