Tuesday, 7 February 2017

आरक्षण : दीमक या दवा

हिंदुस्तान, भारत, आर्यावर्त, सोने की चिड़िया, इंडिया  ना जाने और  कितने नामो से जाना जाता है अपना महान देश, और इसकी महानता पर गर्व है मुझे, ना जाने कितने किस्से सुने है वीरो के, बस एक कमी मैं देख पाता हूँ मुझे ये नही पता चल पाता कि फलाने राम ने  फला आरक्षण के अन्तर्गत आततायी  रावण को मारा, या फलाने आर्यभट्ट ने फला आरक्षण के अन्तर्गत गणित के सूत्रों का अविष्कार किया।
आज देश जब सबका साथ, सबका विकास जैसी नीतियों पर काम करते हुए यह कहता है कि आरक्षण किसी वर्ग विशेष का संवैधानिक अधिकार है तो बात गले से नहीं उतरती, वह संविधान जो  चौदहवे अनुच्छेद में यह व्याख्या करता है की सभी समान है , Right To Eqality  की बात करता है उसी देश के तमिलनाडु जैसे राज्य में सुप्रीम्र कोर्ट तक के आदेश को ताक पर रख कर लगभग 69  प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाता है। 
आरक्षण क्यों, कब तक , किसके लिए, किसी के लिए तो केवल उन्ही के लिए क्यों ? इन सारे सवालो का जवाब किसी के पास नहीं है , सत्ता में बने रहने के गंदे खेल ने नेताओ की मानसिकता को इतना खोखला कर दिया है कि ये प्रश्न उनके मन मस्तिष्क को कभी कौंधता ही नहीं है , विश्व के सर्वाधिक युवाओ वाले देश का युवा किस चैराहे पर आकर खड़ा है , उसकी परवाह करने वाला कोई नहीं है, पुरे विश्व के कुल 17. 5  प्रतिशत आबादी वाले देश भारत में विश्व की कुल  17  % आत्महत्याएं  दर्ज हुई हैं, क्या किसी ने ये जानने की कोशिश कि की ये आत्महत्याए क्यों हुई हैं ?
देश की तमाम संस्थाए और राजनीतिक  पार्टिया  जो  सर्व जन हिताय की बात करती हैं उनमे से क्यों किसी ने अभी तक इस विषय में बात करने तक की कोशिश नहीं की ? क्या ये ऐसा विषय है जिस पर बात नहीं की जा सकती ? क्या देश के एक वर्ग विशेष को ही आगे ले जाने की जरुरत है? क्या वह वर्ग जो दुर्भाग्यवश ऊँची जाति में पैदा हो गया है, उसे जीने का कोई अधिकार नहीं है ?
मुझे लगता है अब वह समय आ गया है जब देश का युवा किसकी क्या जात है, क्या धर्म है यह जानना नहीं चाहता , परंतु हमारा तंत्र कुछ ऐसा है कि ना चाहते हुए भी वह इन चीजो में लिप्त हो जाता है।
मुझे लगता है अब समय आ गया है जब देश का युवा चाहे वह समाज के किसी वर्ग से हो, इस मुद्दे पर बहस करेगा और इस दीमक से देश को खोखला होने से बचाएगा !! जय हिन्द !!
 

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