Monday, 28 October 2019

!!चलो दिये लूटते हैं !!

हर रोज सुबह उठता हूँ तो पहले बालकनी में जा कर देखता हूँ की सूर्य कहाँ तक चढ़ आया है, धूप  कितनी है, बालकनी में लगे पौधे ठीक हैं कि नहीं , पर आज अचानक जब सुबह उठा तो अनायास ही पहला ध्यान रात में लगाए दियों पर गया, देखा तो सारे दिए जस के तस  पड़े थे, फिर ध्यान आया कि घर में  भला कौन आएगा , भागता हुआ सीढ़ियों की तरफ गया , वहाँ भी सारे दिये  बुझ कर शांत से पड़े हुए थे , मैंने एक झटके में सारे दिए समेटे और सबको लेकर घर में घुस गया, फिर लगा कि किसी ने देखा तो नहीं ? दियो को घर में रख कर फिर बाहर गया, कोई नहीं था वहाँ , फिर झट से अंदर आया और दिये  गिनने  शुरू कर दिए , गिनते गिनते ध्यान आया कि मै गिन क्यों रहा हूँ, और इन दियो का मै करूँगा क्या ?  सारे दिये हाथ से छूट गए और आँखे बचपन के उस दौर में चली गयी  जब दीवाली की सुबह  माँ सोते में  ही काजल लगा  दिया करती थी (क्यूँकि जगने पर कोई लगवाता नहीं )और सुबह जल्दी जगा कर कहती थी , दिया लूटने नहीं जाओगे क्या? सुनते ही सारी नीद गायब हो जाती थी और हमारी टोली  पूरे गाँव के दिये  लूटने निकल पड़ती थी , एक होड़ सी थी हम सब में सबसे ज्यादा दिया लूटने का , हालाँकि  उन दियों का उपयोग बस इतना सा था कि उस पूरे दिन उसमे छेद  करके  तराजू बनाया जाता था और घर में पड़ी सारी चीजे उस रोज तौल दी जाती थी, वैसे प्रतिस्पर्धा यही ख़त्म नहीं होती उसके बाद  होड़ लगती थी सबसे ज्यादा तराजू किसके हैं ? उसमे से कई दिये छेद करते समय टूट जाया करते थे तो कभी कभार सबसे  ज्यादा दिया लूटने वाला भी दूसरे से दिये उधर माँग रहा होता था ,? दीवाली के अगले रोज पूरे दिन का काम ही यही होता था आँख मे लगे काजल को छुड़ाते रहना और घर में पड़ी हर छोटी बड़ी चीज को अपने तराजू से तौलना.. 
            पर जब से इस आधुनिक शहर की तरफ बढ़े हैं ना दिया है ना उसे लूटने वाला और Lakme  और दुनिया भर के महंगे काजल और Eye  लाइनर के जमाने मे ना तेल और दिये के सहारे से पारा गया काजल लगाने वाला और ना ही उसे पारने वाला, हालाँकि इस दीवाली मै अपने ही लगाये दिये लूटकर खुश हूँ, हाँ तराजू नहीं बना पाउँगा इस बात का दुःख जरूर है, पर अब उस दिये के तराजू की जरुरत ही कहाँ , हम हर वक़्त हर क्षण एक दूसरे को अपने अनुसार तौलते ही तो रहते हैं ?? शुभ दीपावली !!

No comments:

Post a Comment

रातो रात दिग्विजय से खड्गे ?

                                                रातो रात दिग्विजय से खड्गे  ? एक बार फिर कांग्रेस में या यूँ कहें कि परिवार में राहुल गाँधी ...